2011

मेरे ख्वाब हैं अधूरे, मेरी इक्छाएं  हैं बाकी ! बहुत छोटा है ये जीवन, मुझे फिर लेना है जनम !
एक शरीर है, तो एक मन भी है, एक मन है अनेकों सपने है,
जब सपने हैं, तभी जीने की इक्छा है, और इक्छा है, तो जीवन का मोह है !
मेरे अरमान हैं अधूरे, जीने की चाह है बाकी ! बहुत छोटा है ये जीवन, मुझे फिर लेना है जनम !
एक इक्छा है, जो प्राणों से प्रिये है, मिटती नहीं है इक्छा, मन पर लिखी है,
पर नहीं है कोई उम्मीद, ना राह है, सम्भव नहीं है, पर मन को यकीन है,
मेरी कहानी है अधूरी, मुझे करनी है पूरी, बहुत छोटा है ये जीवन, मुझे फिर लेना है जनम !

दुनिया के बाज़ार में दिल् के बदले तो कुछ मिलता नहीं है ! तो गरीबी में मैं अपनी तक़दीर बेचने बाज़ार चला गया ! मेरी किस्मत का एक खरीददार मिला, जो मुझे मालामाल कर गया ! कुछ अरसे बाद मैंने देखा, की जिसके सपनों में मैं खोया रहता था, अब उसका मालिक वो खरीददार है ! पीछे छूट गयी बातों को याद किया, और उपरवाले को कोसता रहा ! मैं सोचता रहा, मेरी तक़दीर तो अच्छी थी, क्यों मैंने उसका सौदा किया ! आसमान की तरफ देखा और खुदा से बोला की, हे ईश्वर मुझे एक मौका और दो ! इस बार गरीबी में भी मैंने अपनी तक़दीर को नहीँ बेचा ! कुछ अरसा गुजर गया, एक दिन वो सुबह सुबह मेरे घर आये, अंदर ही अंदर मैं बहुत खुश हुआ ! बातें शुरू हुयी, और धीरे-धीरे एक एक कर तस्वीर साफ़ होती चली गयी ! कभी मैं भी बाज़ार में निकला था, वैसे ही आज वो भी बाज़ार में निकले थे, मैं अपनी तक़दीर बेचने निकला था, वो अपनी खूबसूरती की बोली लगवा रहे थे, मैं गरीबी में किया था, वो शौक से कर रहे थे ! उनसे वक्त माँगा, और उनको इज्ज़त से रुखसत किया ! खुदा का शुक्रिया किया, मेरी आँखों से आंसू निकलने लगे, और अफ़सोस हुआ की खुदा से एक मौका और क्यों माँगा ! मैं समझा मेरी तक़दीर अच्छी है, पहली बार भी, और दूसरी बार भी, और ये भी की तक़दीर ना बिकती है, और ना बेचीं जाती है !

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Here is key quotes from Steve Jobs, the legendary co-founder and former chief executive of Apple Inc, who died on Wednesday after a years-long battle with cancer.

#"Remembering that I'll be dead soon is the most important tool I've ever encountered to help me make the big choices in life. Because almost everything -- all external expectations, all pride, all fear of embarrassment or failure -- these things just fall away in the face of death, leaving only what is truly important. Remembering that you are going to die is the best way I know to avoid the trap of thinking you have something to lose. You are already naked. There is no reason not to follow your heart."

#"You can't connect the dots looking forward; you can only connect them looking backwards. So you have to trust that the dots will somehow connect in your future. You have to trust in something - your gut, destiny, life, karma, whatever. This approach has never let me down, and it has made all the difference in my life."

#"Death...the single best invention of Life. It's life's change agent. It clears out the old to make way for the new."

ख्वाब और हकीकत में एक कदम का फासला है, साहस ! जैसे रात और दिन में एक पल का फासला है, सुबह ! हकीकत के लिए साहस जरुरी, और दिन के लिए सुबह !

सम्बन्धों को कुछ करीब से देखा है मैंने,
अक्सर सम्बन्धों की मार झेली है मैंने !
बिखरते रिश्तों को खून से जोड़ा है मैंने,
जोड़ कर रिश्तों को अपना दिल् तोड़ा है मैंने !

जहाँ दिल् में रखते लोग विष है,
मुहँ से उगलते सिर्फ गुड़ है,
हम समझे की ये बाग के फूल है,
मेरा दिल् कच्चा और बेवकूफ है!

दिल् की बेवकूफी से बहुत कुछ हरा है मैंने,
सच्चे दिल् से कई बार रोया है मैंने !

स्नेह में होती बहुत गहराई है,
हमने समझा इसमें सिर्फ सच्चाई है,
छूकर देखा तो जाना ये परछाई है,
जानकर ये सब मन मेरा दुखी है,

अकेले अकेले कितनी तन्हाई बटोरी है मैंने,
बटोर कर काँटों का हर उसे सहेजा है मैंने !

काटें है राह में फिर भी उसी पर चलूँगा !
मुश्किलें कितनी भी हो अपने दम पे जिऊंगा !

बरसती है धुप फिर भी पेड़ छांव नहीं चाहती,
सुख जाती है नदिया पर पानी तलाश नहीं करती,
एक अपाहिज भी रहम को स्वीकार नहीं करता,
बर्बाद होती है फ़सल पर किसान हिम्मत नहीं हारता !

बढ़ती हो मुश्किलें पर मेहरबानी की रोटी नहीं खाऊंगा !
मुश्किलें कितनी भी हो अपने दम पे जिऊंगा !

सफ़र में जवान जगह ढूंढते बूढ़े खड़े नज़र आते है,
कैसी पीढ़ी है होश आते ही स्वाभिमान बेच देती है,
दोस्ती और रिश्तों की नाव में सपने पूरी करती है,
आज से चलिए हम सब मेहरबानी को दुत्कारते देते हैं !

तो सोचा है मुसीबत में भी रूह की आवाज़ सुनेंगे !
मुश्किलें कितनी भी हो अपने दम पे जिऊंगा !

जीने की तमन्ना जब ना हो, ज़िंदगी पंख लगा देती है ,
जब हर पल जीना चाहूँ , ज़िंदगी दरवाजे बंद कर देती हो !

ज़िंदगी तुमसे कुछ पूछना है, कुछ नहीं
ज़िंदगी तुमसे कुछ कहना है, कुछ नहीं,

जब ज़िंदगी में गम की आंधी हो, बारिश से आंसू छुपा देती हो,
चाहे जितनी नाइंसाफी करती हो, ज़िंदगी कोई जवाब नहीं देती हो !

ज़िंदगी तुमसे कुछ शिकायत है, कुछ नहीं,
ज़िंदगी तुमसे कुछ कहना है, कुछ नहीं,

जो अच्छा लगे उसे छीन लेती हो, फिर मुस्कुराने को कहती हो,
ज़िंदगी कभी साथ नहीं देती हो, पर हर पल साथ रहती हो !

ज़िंदगी तुमसे कुछ मांगना है , कुछ नहीं,
ज़िंदगी तुमसे कुछ कहना है, कुछ नहीं,

चुंबन की आस में सुख गए मेरे नयन, चुंबन की खातिर मैं भूल गया हर वचन !
इस मदहोशी में इज्ज़त की परवाह करे कौन, सफलता के एक चुंबन को आतुर है मेरा मन !

होंठों को चाहिए बस एक मधुर चुंबन, इसके नशे में चूर मैं खोया सुख चैन !
फिर भी दाँव पर ज़िंदगी लगाये कौन, सफलता के एक चुंबन को आतुर है मेरा मन !


झकझोरती है तुम्हारी आँखों का स्पंदन, तड़पती है तुम्हारी होंठों की थिरकन !
अब रोकने से रुकता नहीं मचलता मन , सफलता के एक चुंबन को आतुर है मेरा मन !

कैसी लगती है तुमको हवाओं की सिहरन, कैसे बिताती हो ये बारिश का मौसम !
फिर क्यूँ मसलती हो ये पागल मन, सफलता के एक चुंबन को आतुर है मेरा मन !

सपनों के सागर में तैर कर खुश हो लेते हैं, की सपने मुठ्ठी में कैद नहीं होती
सरल जो राह हो उसी ओर कदम बढ़ा देते हैं, की सच्ची राह कभी सरल नहीं होती

हर खुशी एक फूल है, हर दर्द एक मोती है,
हर बीता समय धागा है, फिर बनती जीवन माला है,
पल पल समय उड़ता है, और फूल मुरझा जाता है,
मोती गले लगा रहता है, दिल के करीब रहता है,

सपनों के सागर में तैर कर खुश हो लेते हैं, की सपने मुठ्ठी में कैद नहीं होती 
सरल जो राह हो उसी ओर कदम बढ़ा देते हैं, की आँखों से फूल नहीं टपकती

हर दोस्त एक रास्ता है, हर दुश्मन एक कांटा है,
समय मील का पत्थर है, हर कोई इनसे गुजरता है,
राह कभी भटका देता है, और राह छूट जाता है,
काँटे दाग छोड़ जाते है, अपनी याद दिलाते है,

सपनों के सागर में तैर कर खुश हो लेते हैं, की सपने मुठ्ठी में कैद नहीं होती 
सरल जो राह हो उसी ओर कदम बढ़ा देते हैं, की राह बदलते देर नहीं लगती

बड़ी खूबसूरत है जिंदगी,
अगर मिठास होती,
तो कुछ और खूबसूरत होती !

रंग तो सभी अनमोल है, पर एक रंग जो अपना लगे,
जिसे देख दिल को सुकून हो, उसके बिना सब सुना लगे !

बड़ी खूबसूरत है आकाश भी,
अगर नीला होता,
तो कुछ और खूबसूरत होता !

फूल तो सभी सुन्दर है, हर फूल अपना नहीं लगे,
दिल में बस एक फूल है, उसके बिना सब सुना लगे !

बड़ी खूबसूरत है रात भी,
अगर चाँद होता,
तो कुछ और खूबसूरत होता !

मैं कुछ कहूँ,
फिर आप मेरे दिल कि बात समझे,
फिर तो बहुत देर लगेगी !

कहने सुनने कि ये बात नहीं है,
दिल कि बात है ये,
कोई काम नहीं है,
खुदा से मैं कुछ नहीं कहता,
पर वो दिल कि बात समझता है,
फिर आप क्यों नहीं समझते हैं !

मैं कुछ करूँ,
फिर आप ऐतबार करें,
फिर तो बहुत देर लगेगी !

कोई इम्तहान दे सकता हूँ,
कुछ भी हार सकता हूँ,
आपका भरोसा पा सकता हूँ,
पर वक्त जब लेगा इम्तहान,
और नाकाम हो गए हम,
फिर आप क्यों इम्तहान लेते हैं !

मैं हंस पडूँ,
और आप सब ठीक समझे,
फिर तो देर ही लगेगी !

मैं बेकार बेमतलब का और बदतमीज़ हूँ,
मुझे अंजान ही रहने दो, पत्थर कि तरह पड़ा रहने दो !

थोड़ी दूर पर मैंने एक ख्वाब छोड़ा है,
उसकी सिसकियाँ अभी तक सुन रहा हूँ,
मासूम सपना बहुत याद आ रहा है,
उसकी याद में अभी तक लिख रहा हूँ,
मैं बुस्दिल, डर गया और पराजित हूँ,
मुझे अंजान ही रहने दो, पत्थर कि तरह पड़ा रहने दो !

कुछ आग ने जलाया कागज को,
कुछ कागज को जलने का मन था,
कुछ मैंने तोडा सपने को,
कुछ सपना मेरा भरी था,
मैं अभागा, मजबूर था और गुमनाम हूँ,
मुझे अंजान ही रहने दो, पत्थर कि तरह पड़ा रहने दो !

मुश्किल नहीं है, तुमको याद रखना
मुश्किल तो है, तुमको भूल जाना !

दिल तो है, पर दिल के होने का एहसास , बिल्कुल नया है,
धुप तो है, पर धुप में बारिश का एहसास, बिल्कुल नया है !

मुश्किल नहीं है, चाँद को देखते रहना
मुश्किल तो है, चाँद को भूल जाना !

प्यार तो है, पर सच्चा प्यार होने का बिश्वास, आसान नहीं है,
हवा तो है, पर हवा के होने का एहसास, बिल्कुल नहीं है !

मुश्किल नहीं है, मुझको भूल जाना
मुश्किल तो है, तुमको भूल जाना !

दिल कि बात करना जुर्म है,
जब सज़ा मिली,
मालूम हुआ ये जुर्म है !

जो चाहते थे मिला नहीं, दिल को अपने खो दिया है,
बस अब उनकी नफरतें, उनकी बेरुखी अपने पास है !
दिल कि बात करना जुर्म है,
जब तन्हा हुए,
मालूम हुआ ये जुर्म है !

मुझमें ऐसी कोई बात नहीं, फिर भी ख्वाब देखता हूँ ,
बस इतनी सी सज़ा मिली, मैं बहुत खुशनसीब हूँ !
दिल कि बात करना जुर्म है,
जब चाँद खोया,
मालूम हुआ ये जुर्म है !

सब पानी का दोष है,
खुद तो हवा हो जाये, छोड़ जाये सच स्याही का !

स्याही जो बिखर गयी, इन पन्नों पर,
मन नंगा हो गया, इन पन्नों पर,
दिल बेपर्दा न होता, इन पन्नों पर,
अगर पानी न होता, इस स्याही में,

नज़रें तो पानी है,
कभी बह जाये कभी उड़ जाये, छोड़ जाये स्याही यादों कि !

नज़रें जो पर गयी, उस चेहेरे पर,
हाल-ए-दिल खुल गया, उस अपने पर,
नज़रों से दूर हो गया, जिसे खोजे नज़र,
स्याही दिल में रह गया, खो गयी नज़र,

सब नज़रों का दोष है,
बिना कहे सब कह गए, छोड़ जाये दर्द स्याही का !

मन में कितनी बातें, आती है, जाती है,
पर कोई बात रुकती नहीं,
अब रुक गयी है वो,
तो फिर जाती नहीं,
काटें कि तरह अनमोल है वो,
भूल जाऊ तो चुभ जाती है !

खूबसूरत है उसकी हर बात, छोटी हो, बड़ी हो,
पर उसे खबर नहीं,
मेरे लिए अनमोल है वो,
पर उसको बिश्वास नहीं,
काटें कि तरह अनमोल है वो,
भूल जाऊ तो चुभ जाती है !

कितने अरमान, कितनी निराशा है,
कितनी शोहरत, कितनी नाकामी है,
कितने सपने, कितने आँसू  है,
कितनी भीड़, कितनी तन्हाई है,
मेरे मन को जो समझता है, ऐसा साथ चाहिए!
मेरे सपनो को जो समझता है, ऐसा साथ चाहिए !

कितना दर्द, कितनी राहत है,
कितनी शांति, कितनी बेचैनी  है,
कितना साहस, कितना डर है,
कितनी नजदीकी, कितनी दूरी है,
मेरे मन को जो समझता है, ऐसा साथ चाहिए!
मेरे दर्द को जो समझाता है, ऐसा साथ चाहिए !

बीती यादों कि बरसात में सब कुछ भींगा भींगा है,
पन्ने है कुछ हांथों में वो भी गीला गीला है,
लिखते लिखते गीत कभी याद तेरी आ जाती है,
आँसू छलके आँखों से शब्दों को गीला कर जाती है !

साँसों में है स्याही थोड़ी बस वो सुखी सुखी है,
लिखता हूँ मैं सावन वो भी सुखा सुखा है ,
छुपाया है चेहरा खुशियों से पर तेज हवा चल जाती है,
आँसू छलके आँखों से शब्दों को गीला कर जाती है !

हम मौसम की परवाह नहीं करेंगे, अब हम दिल खोल कर रोयेंगे,
इस उम्मीद में कि सब बदलेगा, आज का दिन भी बीत गया !

झूठ सुनकर कान दर्द में कराहते है,
होंठ सच बोलने से छिल जाते है,
फिर भी हम दूर नहीं जाते है,
बटोरते है झूठ रात में पी जाते है,
झूठ का ज़हर हम पीते रहेंगे, पर सच कभी नहीं बोलेंगे ,
इस उम्मीद में कि सब बदलेगा, आज का दिन भी बीत गया !

हर दिन हम रंगों से होली खेलते है,
रंग तनाव और तिरस्कार के होते है,
खेलकर होली दर्द और घाव मिलते है,
बदलते है ज़ख़्म और मलहम लगते है,
इस रंग को कीचड़ में बदल देंगे, पर इसका मज़ा नहीं चुकेंगे ,
इस उम्मीद में कि सब बदलेगा, आज का दिन भी बीत गया !

मृत्यु तो पड़ाव है, और हर पड़ाव से नई सवारी है
समय तो अनन्त है, और हम करोड़ों वषों के राही है !

राह में कुछ छुट गया, आगे कुछ मिलेगा,
हमने कुछ काम किया है, कुछ बाकी रहेगा,
आँखों में खवाब रखा है, कुछ और जन्मेगा,
दिल में संतोष नहीं है, कब मन भरेगा !

सब कुछ अधूरा है, अभी बहुत काम करना बाकी है ,
समय तो अनन्त है, और हम करोड़ों वर्षों के रही है !

यहाँ कुछ सम्पूर्ण नहीं है, न कल होगा ,
जो सब, आज करते है, कल भी दौड़ेगा,
फिर किस बात की जल्दी है, क्यों दुखी रहेगा,
जो बेफिक्र काम करता है, वही सुखी रहेगा !

सम्पूर्ण कुछ नहीं है, और इसे पूरा करना जीवन है ,
समय तो अनन्त है, और करोड़ों वर्षों के रही है !

सूरज नहाने को सागर में उतरा है , देखो ये चाँद पानी से छलका है ,
सूरज की रौशनी चाँद ले के चला है , थोड़ी रौशनी चाँद तारों में बांटता है !

धरती से सूरज बहुत प्रेम करता है, सूरज सागर को दूत बनाता है,
सागर बादल को पत्र बनाता  है, प्रेम वर्षा में धरती भींग जाती है !

चौखट पे आकाश दिया जलाये रहता है, दीये की रोशनी पतंगे को खिचती है,
धरती पतंगा बन सूरज को निहारती है,  धरती प्रेम में झूमने लगती है !

अच्छी है खुदगर्जी सोंच के उससे शादी रचावोगे,
या है तुममे कुछ बात जो खुददार बनना चाहोगे!
 
     होशियार है वो जो देश छोरकर चले जाते है,
     जरुरत हो तो कंप्यूटर पर बात करते है,
     कामयाब है वो देखकर हम भी चले देते हैं,
     आगे है वो पीछे नंगो को छोड़ देते है !
सोच लो अभी जीवन में क्या बनना चाहोगे !
करके चाकरी क्या मिटटी का क़र्ज़ लौटा पावोगे !
   
     सोंचा है कैसे भी बड़ा डॉक्टर बनना है,
     दोस्त है जितने सबको पीछे करना है,
     दर्द है जितना उसे पैसा बनाना है,
     देखा है बंगला वैसा ही एक बनाना है !
सोच लो अभी जीवन में क्या बनना चाहोगे !
लूट के पैसा क्या उनकी बददुआ लौटावोगे !
   
     समय है ऐसा चपरासी भी ताव देते है,
     काम है सही फिर भी पैसा लेते है,
     आराम है इतना की दर्द भूल जाते है,
     किस्मत है जिसकी वो लाट साहब बनते है !
सोच लो अभी जीवन में क्या बनना चाहोगे !
बन के भ्रष्ट क्या तुम खुद मिट नहीं जावोगे !


मेरे गम से जिनका न था कोई वास्ता , सुन के दर्द मेरा हमदर्द हो गए !
और मेरी खुशियों का था जो रास्ता , उनको न था मेरे दर्द से कोई वास्ता !


मैं उदास नहीं लेकिन खुशी की कोई बात नहीं है !
 मैं परेशान नहीं लेकिन होंठो पे मुस्कान भी नहीं है !
मैं दुश्मन नहीं लेकिन ये वफादार भी नहीं है !  
 मैं दूर नहीं लेकिन ये दिल के करीब भी नहीं है !

 किसी की तलाश में रात दिन भटकते है हम,
 उसके इंतज़ार में जाने कब से तारे गिनते हैं हम,
 इस शहर में तारे की तरह टिमटिमाते हैं हम,
 तेज रौशनी में डर के मारे थरथराते हैं हम !
 ......................कोई कहानी नहीं फिर भी दिल चुप रहता नहीं है !

नदी की धार में पते की तरह सरकते हैं हम,
 दिल के बाग में एक फूल के लिए तरसते हैं हम,
 धुप की बूंदों में मन के कागज को जलाते हैं हम,
 सावन के शोर में जलती राह पर चलते हैं हम !
 ........................कोई साथ नहीं फिर भी तन्हाई मेरे पास नहीं है !

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