मेरे ख्वाब हैं अधूरे
मेरे ख्वाब हैं अधूरे, मेरी इक्छाएं हैं बाकी ! बहुत छोटा है ये जीवन, मुझे फिर लेना है जनम !
एक शरीर है, तो एक मन भी है, एक मन है अनेकों सपने है,
जब सपने हैं, तभी जीने की इक्छा है, और इक्छा है, तो जीवन का मोह है !
मेरे अरमान हैं अधूरे, जीने की चाह है बाकी ! बहुत छोटा है ये जीवन, मुझे फिर लेना है जनम !
एक इक्छा है, जो प्राणों से प्रिये है, मिटती नहीं है इक्छा, मन पर लिखी है,
पर नहीं है कोई उम्मीद, ना राह है, सम्भव नहीं है, पर मन को यकीन है,
मेरी कहानी है अधूरी, मुझे करनी है पूरी, बहुत छोटा है ये जीवन, मुझे फिर लेना है जनम !