सूरज नहाने को सागर में उतरा है , देखो ये चाँद पानी से छलका है ,
सूरज की रौशनी चाँद ले के चला है , थोड़ी रौशनी चाँद तारों में बांटता है !
धरती से सूरज बहुत प्रेम करता है, सूरज सागर को दूत बनाता है,
सागर बादल को पत्र बनाता है, प्रेम वर्षा में धरती भींग जाती है !
चौखट पे आकाश दिया जलाये रहता है, दीये की रोशनी पतंगे को खिचती है,
धरती पतंगा बन सूरज को निहारती है, धरती प्रेम में झूमने लगती है !
सूरज की रौशनी चाँद ले के चला है , थोड़ी रौशनी चाँद तारों में बांटता है !
धरती से सूरज बहुत प्रेम करता है, सूरज सागर को दूत बनाता है,
सागर बादल को पत्र बनाता है, प्रेम वर्षा में धरती भींग जाती है !
चौखट पे आकाश दिया जलाये रहता है, दीये की रोशनी पतंगे को खिचती है,
धरती पतंगा बन सूरज को निहारती है, धरती प्रेम में झूमने लगती है !