May 2011

मैं कुछ कहूँ,
फिर आप मेरे दिल कि बात समझे,
फिर तो बहुत देर लगेगी !

कहने सुनने कि ये बात नहीं है,
दिल कि बात है ये,
कोई काम नहीं है,
खुदा से मैं कुछ नहीं कहता,
पर वो दिल कि बात समझता है,
फिर आप क्यों नहीं समझते हैं !

मैं कुछ करूँ,
फिर आप ऐतबार करें,
फिर तो बहुत देर लगेगी !

कोई इम्तहान दे सकता हूँ,
कुछ भी हार सकता हूँ,
आपका भरोसा पा सकता हूँ,
पर वक्त जब लेगा इम्तहान,
और नाकाम हो गए हम,
फिर आप क्यों इम्तहान लेते हैं !

मैं हंस पडूँ,
और आप सब ठीक समझे,
फिर तो देर ही लगेगी !

मैं बेकार बेमतलब का और बदतमीज़ हूँ,
मुझे अंजान ही रहने दो, पत्थर कि तरह पड़ा रहने दो !

थोड़ी दूर पर मैंने एक ख्वाब छोड़ा है,
उसकी सिसकियाँ अभी तक सुन रहा हूँ,
मासूम सपना बहुत याद आ रहा है,
उसकी याद में अभी तक लिख रहा हूँ,
मैं बुस्दिल, डर गया और पराजित हूँ,
मुझे अंजान ही रहने दो, पत्थर कि तरह पड़ा रहने दो !

कुछ आग ने जलाया कागज को,
कुछ कागज को जलने का मन था,
कुछ मैंने तोडा सपने को,
कुछ सपना मेरा भरी था,
मैं अभागा, मजबूर था और गुमनाम हूँ,
मुझे अंजान ही रहने दो, पत्थर कि तरह पड़ा रहने दो !

मुश्किल नहीं है, तुमको याद रखना
मुश्किल तो है, तुमको भूल जाना !

दिल तो है, पर दिल के होने का एहसास , बिल्कुल नया है,
धुप तो है, पर धुप में बारिश का एहसास, बिल्कुल नया है !

मुश्किल नहीं है, चाँद को देखते रहना
मुश्किल तो है, चाँद को भूल जाना !

प्यार तो है, पर सच्चा प्यार होने का बिश्वास, आसान नहीं है,
हवा तो है, पर हवा के होने का एहसास, बिल्कुल नहीं है !

मुश्किल नहीं है, मुझको भूल जाना
मुश्किल तो है, तुमको भूल जाना !

दिल कि बात करना जुर्म है,
जब सज़ा मिली,
मालूम हुआ ये जुर्म है !

जो चाहते थे मिला नहीं, दिल को अपने खो दिया है,
बस अब उनकी नफरतें, उनकी बेरुखी अपने पास है !
दिल कि बात करना जुर्म है,
जब तन्हा हुए,
मालूम हुआ ये जुर्म है !

मुझमें ऐसी कोई बात नहीं, फिर भी ख्वाब देखता हूँ ,
बस इतनी सी सज़ा मिली, मैं बहुत खुशनसीब हूँ !
दिल कि बात करना जुर्म है,
जब चाँद खोया,
मालूम हुआ ये जुर्म है !

सब पानी का दोष है,
खुद तो हवा हो जाये, छोड़ जाये सच स्याही का !

स्याही जो बिखर गयी, इन पन्नों पर,
मन नंगा हो गया, इन पन्नों पर,
दिल बेपर्दा न होता, इन पन्नों पर,
अगर पानी न होता, इस स्याही में,

नज़रें तो पानी है,
कभी बह जाये कभी उड़ जाये, छोड़ जाये स्याही यादों कि !

नज़रें जो पर गयी, उस चेहेरे पर,
हाल-ए-दिल खुल गया, उस अपने पर,
नज़रों से दूर हो गया, जिसे खोजे नज़र,
स्याही दिल में रह गया, खो गयी नज़र,

सब नज़रों का दोष है,
बिना कहे सब कह गए, छोड़ जाये दर्द स्याही का !

मन में कितनी बातें, आती है, जाती है,
पर कोई बात रुकती नहीं,
अब रुक गयी है वो,
तो फिर जाती नहीं,
काटें कि तरह अनमोल है वो,
भूल जाऊ तो चुभ जाती है !

खूबसूरत है उसकी हर बात, छोटी हो, बड़ी हो,
पर उसे खबर नहीं,
मेरे लिए अनमोल है वो,
पर उसको बिश्वास नहीं,
काटें कि तरह अनमोल है वो,
भूल जाऊ तो चुभ जाती है !

कितने अरमान, कितनी निराशा है,
कितनी शोहरत, कितनी नाकामी है,
कितने सपने, कितने आँसू  है,
कितनी भीड़, कितनी तन्हाई है,
मेरे मन को जो समझता है, ऐसा साथ चाहिए!
मेरे सपनो को जो समझता है, ऐसा साथ चाहिए !

कितना दर्द, कितनी राहत है,
कितनी शांति, कितनी बेचैनी  है,
कितना साहस, कितना डर है,
कितनी नजदीकी, कितनी दूरी है,
मेरे मन को जो समझता है, ऐसा साथ चाहिए!
मेरे दर्द को जो समझाता है, ऐसा साथ चाहिए !

बीती यादों कि बरसात में सब कुछ भींगा भींगा है,
पन्ने है कुछ हांथों में वो भी गीला गीला है,
लिखते लिखते गीत कभी याद तेरी आ जाती है,
आँसू छलके आँखों से शब्दों को गीला कर जाती है !

साँसों में है स्याही थोड़ी बस वो सुखी सुखी है,
लिखता हूँ मैं सावन वो भी सुखा सुखा है ,
छुपाया है चेहरा खुशियों से पर तेज हवा चल जाती है,
आँसू छलके आँखों से शब्दों को गीला कर जाती है !

हम मौसम की परवाह नहीं करेंगे, अब हम दिल खोल कर रोयेंगे,
इस उम्मीद में कि सब बदलेगा, आज का दिन भी बीत गया !

झूठ सुनकर कान दर्द में कराहते है,
होंठ सच बोलने से छिल जाते है,
फिर भी हम दूर नहीं जाते है,
बटोरते है झूठ रात में पी जाते है,
झूठ का ज़हर हम पीते रहेंगे, पर सच कभी नहीं बोलेंगे ,
इस उम्मीद में कि सब बदलेगा, आज का दिन भी बीत गया !

हर दिन हम रंगों से होली खेलते है,
रंग तनाव और तिरस्कार के होते है,
खेलकर होली दर्द और घाव मिलते है,
बदलते है ज़ख़्म और मलहम लगते है,
इस रंग को कीचड़ में बदल देंगे, पर इसका मज़ा नहीं चुकेंगे ,
इस उम्मीद में कि सब बदलेगा, आज का दिन भी बीत गया !

मृत्यु तो पड़ाव है, और हर पड़ाव से नई सवारी है
समय तो अनन्त है, और हम करोड़ों वषों के राही है !

राह में कुछ छुट गया, आगे कुछ मिलेगा,
हमने कुछ काम किया है, कुछ बाकी रहेगा,
आँखों में खवाब रखा है, कुछ और जन्मेगा,
दिल में संतोष नहीं है, कब मन भरेगा !

सब कुछ अधूरा है, अभी बहुत काम करना बाकी है ,
समय तो अनन्त है, और हम करोड़ों वर्षों के रही है !

यहाँ कुछ सम्पूर्ण नहीं है, न कल होगा ,
जो सब, आज करते है, कल भी दौड़ेगा,
फिर किस बात की जल्दी है, क्यों दुखी रहेगा,
जो बेफिक्र काम करता है, वही सुखी रहेगा !

सम्पूर्ण कुछ नहीं है, और इसे पूरा करना जीवन है ,
समय तो अनन्त है, और करोड़ों वर्षों के रही है !

सूरज नहाने को सागर में उतरा है , देखो ये चाँद पानी से छलका है ,
सूरज की रौशनी चाँद ले के चला है , थोड़ी रौशनी चाँद तारों में बांटता है !

धरती से सूरज बहुत प्रेम करता है, सूरज सागर को दूत बनाता है,
सागर बादल को पत्र बनाता  है, प्रेम वर्षा में धरती भींग जाती है !

चौखट पे आकाश दिया जलाये रहता है, दीये की रोशनी पतंगे को खिचती है,
धरती पतंगा बन सूरज को निहारती है,  धरती प्रेम में झूमने लगती है !

अच्छी है खुदगर्जी सोंच के उससे शादी रचावोगे,
या है तुममे कुछ बात जो खुददार बनना चाहोगे!
 
     होशियार है वो जो देश छोरकर चले जाते है,
     जरुरत हो तो कंप्यूटर पर बात करते है,
     कामयाब है वो देखकर हम भी चले देते हैं,
     आगे है वो पीछे नंगो को छोड़ देते है !
सोच लो अभी जीवन में क्या बनना चाहोगे !
करके चाकरी क्या मिटटी का क़र्ज़ लौटा पावोगे !
   
     सोंचा है कैसे भी बड़ा डॉक्टर बनना है,
     दोस्त है जितने सबको पीछे करना है,
     दर्द है जितना उसे पैसा बनाना है,
     देखा है बंगला वैसा ही एक बनाना है !
सोच लो अभी जीवन में क्या बनना चाहोगे !
लूट के पैसा क्या उनकी बददुआ लौटावोगे !
   
     समय है ऐसा चपरासी भी ताव देते है,
     काम है सही फिर भी पैसा लेते है,
     आराम है इतना की दर्द भूल जाते है,
     किस्मत है जिसकी वो लाट साहब बनते है !
सोच लो अभी जीवन में क्या बनना चाहोगे !
बन के भ्रष्ट क्या तुम खुद मिट नहीं जावोगे !


मेरे गम से जिनका न था कोई वास्ता , सुन के दर्द मेरा हमदर्द हो गए !
और मेरी खुशियों का था जो रास्ता , उनको न था मेरे दर्द से कोई वास्ता !


मैं उदास नहीं लेकिन खुशी की कोई बात नहीं है !
 मैं परेशान नहीं लेकिन होंठो पे मुस्कान भी नहीं है !
मैं दुश्मन नहीं लेकिन ये वफादार भी नहीं है !  
 मैं दूर नहीं लेकिन ये दिल के करीब भी नहीं है !

 किसी की तलाश में रात दिन भटकते है हम,
 उसके इंतज़ार में जाने कब से तारे गिनते हैं हम,
 इस शहर में तारे की तरह टिमटिमाते हैं हम,
 तेज रौशनी में डर के मारे थरथराते हैं हम !
 ......................कोई कहानी नहीं फिर भी दिल चुप रहता नहीं है !

नदी की धार में पते की तरह सरकते हैं हम,
 दिल के बाग में एक फूल के लिए तरसते हैं हम,
 धुप की बूंदों में मन के कागज को जलाते हैं हम,
 सावन के शोर में जलती राह पर चलते हैं हम !
 ........................कोई साथ नहीं फिर भी तन्हाई मेरे पास नहीं है !

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