मन के कागज


मैं उदास नहीं लेकिन खुशी की कोई बात नहीं है !
 मैं परेशान नहीं लेकिन होंठो पे मुस्कान भी नहीं है !
मैं दुश्मन नहीं लेकिन ये वफादार भी नहीं है !  
 मैं दूर नहीं लेकिन ये दिल के करीब भी नहीं है !

 किसी की तलाश में रात दिन भटकते है हम,
 उसके इंतज़ार में जाने कब से तारे गिनते हैं हम,
 इस शहर में तारे की तरह टिमटिमाते हैं हम,
 तेज रौशनी में डर के मारे थरथराते हैं हम !
 ......................कोई कहानी नहीं फिर भी दिल चुप रहता नहीं है !

नदी की धार में पते की तरह सरकते हैं हम,
 दिल के बाग में एक फूल के लिए तरसते हैं हम,
 धुप की बूंदों में मन के कागज को जलाते हैं हम,
 सावन के शोर में जलती राह पर चलते हैं हम !
 ........................कोई साथ नहीं फिर भी तन्हाई मेरे पास नहीं है !

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