जुर्म

दिल कि बात करना जुर्म है,
जब सज़ा मिली,
मालूम हुआ ये जुर्म है !

जो चाहते थे मिला नहीं, दिल को अपने खो दिया है,
बस अब उनकी नफरतें, उनकी बेरुखी अपने पास है !
दिल कि बात करना जुर्म है,
जब तन्हा हुए,
मालूम हुआ ये जुर्म है !

मुझमें ऐसी कोई बात नहीं, फिर भी ख्वाब देखता हूँ ,
बस इतनी सी सज़ा मिली, मैं बहुत खुशनसीब हूँ !
दिल कि बात करना जुर्म है,
जब चाँद खोया,
मालूम हुआ ये जुर्म है !
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