सब पानी का दोष है,
खुद तो हवा हो जाये, छोड़ जाये सच स्याही का !
स्याही जो बिखर गयी, इन पन्नों पर,
मन नंगा हो गया, इन पन्नों पर,
दिल बेपर्दा न होता, इन पन्नों पर,
अगर पानी न होता, इस स्याही में,
नज़रें तो पानी है,
कभी बह जाये कभी उड़ जाये, छोड़ जाये स्याही यादों कि !
नज़रें जो पर गयी, उस चेहेरे पर,
हाल-ए-दिल खुल गया, उस अपने पर,
नज़रों से दूर हो गया, जिसे खोजे नज़र,
स्याही दिल में रह गया, खो गयी नज़र,
सब नज़रों का दोष है,
बिना कहे सब कह गए, छोड़ जाये दर्द स्याही का !
खुद तो हवा हो जाये, छोड़ जाये सच स्याही का !
स्याही जो बिखर गयी, इन पन्नों पर,
मन नंगा हो गया, इन पन्नों पर,
दिल बेपर्दा न होता, इन पन्नों पर,
अगर पानी न होता, इस स्याही में,
नज़रें तो पानी है,
कभी बह जाये कभी उड़ जाये, छोड़ जाये स्याही यादों कि !
नज़रें जो पर गयी, उस चेहेरे पर,
हाल-ए-दिल खुल गया, उस अपने पर,
नज़रों से दूर हो गया, जिसे खोजे नज़र,
स्याही दिल में रह गया, खो गयी नज़र,
सब नज़रों का दोष है,
बिना कहे सब कह गए, छोड़ जाये दर्द स्याही का !