एक मधुर चुंबन

चुंबन की आस में सुख गए मेरे नयन, चुंबन की खातिर मैं भूल गया हर वचन !
इस मदहोशी में इज्ज़त की परवाह करे कौन, सफलता के एक चुंबन को आतुर है मेरा मन !

होंठों को चाहिए बस एक मधुर चुंबन, इसके नशे में चूर मैं खोया सुख चैन !
फिर भी दाँव पर ज़िंदगी लगाये कौन, सफलता के एक चुंबन को आतुर है मेरा मन !


झकझोरती है तुम्हारी आँखों का स्पंदन, तड़पती है तुम्हारी होंठों की थिरकन !
अब रोकने से रुकता नहीं मचलता मन , सफलता के एक चुंबन को आतुर है मेरा मन !

कैसी लगती है तुमको हवाओं की सिहरन, कैसे बिताती हो ये बारिश का मौसम !
फिर क्यूँ मसलती हो ये पागल मन, सफलता के एक चुंबन को आतुर है मेरा मन !
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