अर्ध सत्य

सपनों के सागर में तैर कर खुश हो लेते हैं, की सपने मुठ्ठी में कैद नहीं होती
सरल जो राह हो उसी ओर कदम बढ़ा देते हैं, की सच्ची राह कभी सरल नहीं होती

हर खुशी एक फूल है, हर दर्द एक मोती है,
हर बीता समय धागा है, फिर बनती जीवन माला है,
पल पल समय उड़ता है, और फूल मुरझा जाता है,
मोती गले लगा रहता है, दिल के करीब रहता है,

सपनों के सागर में तैर कर खुश हो लेते हैं, की सपने मुठ्ठी में कैद नहीं होती 
सरल जो राह हो उसी ओर कदम बढ़ा देते हैं, की आँखों से फूल नहीं टपकती

हर दोस्त एक रास्ता है, हर दुश्मन एक कांटा है,
समय मील का पत्थर है, हर कोई इनसे गुजरता है,
राह कभी भटका देता है, और राह छूट जाता है,
काँटे दाग छोड़ जाते है, अपनी याद दिलाते है,

सपनों के सागर में तैर कर खुश हो लेते हैं, की सपने मुठ्ठी में कैद नहीं होती 
सरल जो राह हो उसी ओर कदम बढ़ा देते हैं, की राह बदलते देर नहीं लगती
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