सम्बन्धों को कुछ करीब से देखा है मैंने,
अक्सर सम्बन्धों की मार झेली है मैंने !
बिखरते रिश्तों को खून से जोड़ा है मैंने,
जोड़ कर रिश्तों को अपना दिल् तोड़ा है मैंने !
जहाँ दिल् में रखते लोग विष है,
मुहँ से उगलते सिर्फ गुड़ है,
हम समझे की ये बाग के फूल है,
मेरा दिल् कच्चा और बेवकूफ है!
दिल् की बेवकूफी से बहुत कुछ हरा है मैंने,
सच्चे दिल् से कई बार रोया है मैंने !
स्नेह में होती बहुत गहराई है,
हमने समझा इसमें सिर्फ सच्चाई है,
छूकर देखा तो जाना ये परछाई है,
जानकर ये सब मन मेरा दुखी है,
अकेले अकेले कितनी तन्हाई बटोरी है मैंने,
बटोर कर काँटों का हर उसे सहेजा है मैंने !