तक़दीर

दुनिया के बाज़ार में दिल् के बदले तो कुछ मिलता नहीं है ! तो गरीबी में मैं अपनी तक़दीर बेचने बाज़ार चला गया ! मेरी किस्मत का एक खरीददार मिला, जो मुझे मालामाल कर गया ! कुछ अरसे बाद मैंने देखा, की जिसके सपनों में मैं खोया रहता था, अब उसका मालिक वो खरीददार है ! पीछे छूट गयी बातों को याद किया, और उपरवाले को कोसता रहा ! मैं सोचता रहा, मेरी तक़दीर तो अच्छी थी, क्यों मैंने उसका सौदा किया ! आसमान की तरफ देखा और खुदा से बोला की, हे ईश्वर मुझे एक मौका और दो ! इस बार गरीबी में भी मैंने अपनी तक़दीर को नहीँ बेचा ! कुछ अरसा गुजर गया, एक दिन वो सुबह सुबह मेरे घर आये, अंदर ही अंदर मैं बहुत खुश हुआ ! बातें शुरू हुयी, और धीरे-धीरे एक एक कर तस्वीर साफ़ होती चली गयी ! कभी मैं भी बाज़ार में निकला था, वैसे ही आज वो भी बाज़ार में निकले थे, मैं अपनी तक़दीर बेचने निकला था, वो अपनी खूबसूरती की बोली लगवा रहे थे, मैं गरीबी में किया था, वो शौक से कर रहे थे ! उनसे वक्त माँगा, और उनको इज्ज़त से रुखसत किया ! खुदा का शुक्रिया किया, मेरी आँखों से आंसू निकलने लगे, और अफ़सोस हुआ की खुदा से एक मौका और क्यों माँगा ! मैं समझा मेरी तक़दीर अच्छी है, पहली बार भी, और दूसरी बार भी, और ये भी की तक़दीर ना बिकती है, और ना बेचीं जाती है !
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