विद्या विनय देती है और शिक्षा घमंड ! आज के समय में हम शिक्षा और विद्या में फर्क नहीं कर पा रहे है ! अगर मैं विद्या और शिक्षा की एक तुलना करूँ तो मुझे लगता है की शिक्षा Hardware की तरह है और विद्या Software की तरह ! शिक्षा तो आपको किसी शिक्षालय में मिल जायेगी, लेकिन विद्या के लिए भारत में अब कोई विद्यालय नहीं बचा है ! अब विद्या लेने के लिए दो तीन रास्ते है! पहला अगर आप एकलव्य हैं तो स्वयं से प्रेरित हो कर आप इसे पा सकते हैं ! दुसरा अगर आपके अभिभावक आपके गुरु हैं तो आपकी मुश्किल कम हो जायेगी आपको आसानी से इसे पा सकते हैं! एक और रास्ता ये है की आपको कोई गुरु मिल जाये, लेकिन ऐसी उम्मीद कम ही है, क्योंकि शिक्षालय में आपको Tutor मिलेंगे गुरु नहीं ! भारत में जब से अंग्रेजों ने यहाँ की गुरुकुल व्यवस्था को गैरकानूनी घोषित कर अपनी शिक्षा प्रणाली शुरू की, यहाँ भी लोग शिक्षा (डिग्री) के पीछे भागने लगे ! भारत की हजारों वर्षों से ये सोंच रही है की विद्या पाने का अधिकार सभी को है, लेकिन अंग्रेजों की सोंच रही है की विद्या सिर्फ राजा के लिए है, बाकी लोगों को तो आदेश का पालन करना है, तो उनको शिक्षा दो ताकि आदेश का पालन सही से कर सके ! आज अगर आप भारत के प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल को देखिये तो आप पाएंगे की वे विश्व के बड़े बड़े शिक्षालयों (IIT, IIM, Harvard, Oxford) से शिक्षित हुए हैं, लेकिन इनमें विद्वान कोई भी नहीं है ! भारत में अगर शिक्षित होने की अंधी दौड़ नहीं होती, और कुछ प्रतिशत लोग भी शिक्षा को छोड़ कर विद्या प्राप्त किये होते तो आज देश इस कदर बेबस नहीं होता !
Knowledge gives politeness, patience & education gives arrogance, attitude.